2015 से लेकर आज तक, टेस्ला के सीईओ एलन मस्क यह कहते आ रहे हैं कि अगले दो सालों में टेस्ला कारें पूरी तरह से खुद चलने लगेंगी। लेकिन उनकी खुद की डेडलाइन बीत चुकी है और यह सपना अभी भी सपना ही है। हैरानी की बात यह है कि $15,000 (करीब 12.5 लाख रुपये) के ‘फुल सेल्फ-ड्राइविंग कैपेबिलिटी’ पैकेज वाली कार भी अभी तक अपने आप नहीं चल पा रही है।
अब, टेस्ला के वकीलों का तर्क है कि कंपनी अपने इन ऊंचे लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाई, यह जरूरी नहीं कि इसे ‘फ्रॉड’ यानी धोखाधड़ी कहा जाए। यह बहस एक क्लास-एक्शन लॉसूट के जवाब में सामने आई है।
टेस्ला के वकीलों ने अदालत में कहा, “किसी लंबे समय से चले आ रहे सपने को पूरा न कर पाना, फ्रॉड नहीं है।”
इस मुकदमे में मस्क और टेस्ला के उन बयानों को सबूत के तौर पर पेश किया गया है, जिनमें कहा गया था कि सॉफ्टवेयर अपडेट की बदौलत अगले एक-दो साल में कारें पूरी तरह से स्वचालित हो जाएंगी। मसाला के तौर पर, 2016 के एक ट्वीट का जिक्र है जहाँ मस्क ने दावा किया था कि एक टेस्ला कार अगले साल तक बिना ड्राइवर के पूरे अमेरिका का सफर तय कर लेगी।
लॉसूट में टेस्ला के एक विवादास्पद वीडियो का भी जिक्र है, जिसमें कार को खुद चलते हुए दिखाया गया था। मुकदमे के मुताबिक, यह वीडियो गुमराह करने वाला था क्योंकि उसे बनाने वाले कर्मचारियों ने बताया कि बिना गड़बड़ी के रूट पूरा करवाने के लिए कई कोशिशें करनी पड़ी थीं।
तो फिर क्या है ‘ऑटोपायलट’ और ‘फुल सेल्फ-ड्राइविंग’ का सच?
- ऑटोपायलट: यह एक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) है, जो हाईवे पर कार को लेन में रखने और दूसरी कारों से दूरी बनाए रखने का काम करता है। मगर इसने रुके हुए इमरजेंसी वाहनों को पहचानने में कई बार गलती की है। टेस्ला का कहना है कि यह सिस्टम चलती हुई कारों के लिए बना है। सुरक्षा संगठनों का मानना है कि ‘ऑटोपायलट’ नाम ड्राइवर को गलत भरोसा देता है कि कार पूरी तरह से खुद चल सकती है।
- फुल सेल्फ-ड्राइविंग कैपेबिलिटी (FSD): यह एक एक्स्ट्रा पैड वाला पैकेज है, जो अभी बीटा वर्जन में है। यह शहर की सड़कों पर स्टीयरिंग, ब्रेकिंग और एक्सलरेटिंग में मदद करने का दावा करता है, लेकिन अभी तक यह पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं है। टेस्ला की वेबसाइट के मुताबिक, अब यह शहर की सड़कों पर स्टीयरिंग पर पूरा नियंत्रण नहीं करता।
टेस्ला का कहना है कि भविष्य में होने वाले सॉफ्टवेयर अपडेट्स (जो कार में वायरलेस तरीके से आ जाएंगे) के जरिए यह सपना एक दिन जरूर पूरा होगा।
टेस्ला का बचाव: ग्राहक जानते थे!
टेस्ला का कहना है कि सिर्फ एलन मस्क की भविष्यवाणियाँ पूरी न हो पाना इस बात का सबूत नहीं है कि कंपनी ने जानबूझकर ग्राहकों को धोखा दिया। उनका तर्क है कि खरीदारों को वेबसाइट और कार के मैनुअल में दी गई चेतावनियों से इन सिस्टम्स की सीमाओं के बारे में पहले से पता था। साथ ही, यह भी साबित नहीं हो पाया है कि इन सिस्टम्स वाली कारों ने सामान्य ड्राइविंग के मुकाबले ज्यादा दुर्घटनाएं की हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो, टेस्ला का मानना है कि “सपना दिखाना और उसे समय पर पूरा न कर पाना कोई अपराध नहीं है।” देखते हैं, अदालत इस तर्क को कितना सही मानती है!
3 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या टेस्ला की ‘फुल सेल्फ-ड्राइविंग’ कार वाकई में खुद चल सकती है?
जी नहीं। अभी तक नहीं। टेस्ला की ‘फुल सेल्फ-ड्राइविंग (FSD)’ सुविधा अभी भी एक बीटा (प्रायोगिक) सिस्टम है जिसे एक सजग ड्राइवर की निरंतर निगरानी की जरूरत होती है। यह कुछ कार्यों में ड्राइवर की मदद कर सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से स्वचालित नहीं है। कंपनी का दावा है कि भविष्य के सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह क्षमता आ सकती है।
2. टेस्ला के ‘ऑटोपायलट’ और ‘फुल सेल्फ-ड्राइविंग’ में क्या अंतर है?
ऑटोपायलट: यह एक बेसिक ड्राइवर असिस्ट सिस्टम है जो मुख्य रूप से हाईवे पर कार को लेन में रखने और आगे वाली कार से सुरक्षित दूरी बनाए रखने का काम करता है। यह कई दूसरी कार कंपनियों के सिस्टम जैसा ही है।
फुल सेल्फ-ड्राइविंग (FSD): यह एक महंगा अपग्रेड है जिसमें ऑटोपायलट के फीचर्स के अलावा, ट्रैफिक लाइट्स और स्टॉप साइन पहचानना, शहर की सड़कों पर ऑटोमैटिकली मुड़ना जैसे एडवांस फीचर्स शामिल हैं। लेकिन यह भी पूरी तरह से स्वायत्त नहीं है।
3. क्या भारत में टेस्ला की ये ‘सेल्फ-ड्राइविंग’ सुविधाएं उपलब्ध हैं?
अभी नहीं। भारत में टेस्ला कारों की आधिकारिक बिक्री अभी शुरू नहीं हुई है। भविष्य में जब टेस्ला भारत में आएगी, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि यहाँ के जटिल ट्रैफिक और विनियमों के चलते ये सुविधाएं किस हद तक पेश की जाती हैं। फिलहाल, भारतीय सड़कों पर इन सिस्टम्स का परीक्षण एक बड़ी चुनौती होगी।





