हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने सुझाव दिया है कि अपनी डाइट से सिर्फ चार चीजों को हटाकर और उन्हें हेल्दी ऑप्शन से बदलकर आप कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
दुनिया भर में हर साल लगभग 2 करोड़ लोगों में कैंसर की पहचान होती है, जिनमें से 1 करोड़ लोगों की मौत हो जाती है। आने वाले आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं, क्योंकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में, हर पांच में से एक व्यक्ति को अपने जीवन में कभी न कभी कैंसर होगा।
भारत में हर साल लगभग 10 लाख लोगों की मौत कैंसर से होती है। एक बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को सही इलाज नहीं मिल पाता या बीमारी का पता समय पर नहीं चल पाता। इसीलिए, विकसित देशों में कैंसर का पता चलने के बाद आधे लोग बच जाते हैं, जबकि भारत में दुर्भाग्य से ज्यादातर मरीजों की मौत हो जाती है।
यह तो हम सभी जानते हैं कि शुरुआती पहचान से बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन इससे भी बेहतर तरीका है कैंसर को होने से ही रोकना! हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मेडिकल साइंस के प्रोफेसर, डॉ. सौरभ सेठी ने सोशल मीडिया पर बताया है कि सिर्फ चार चीजों को अपनी डाइट से बदलना कैंसर के खतरे को कम करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम हो सकता है।
तो कौन सी हैं वो चार चीजें जिन्हें बदलने की जरूरत है?
1. मीठे पेय पदार्थों की जगह पिएं स्पार्कलिंग वाटर
कोल्ड ड्रिंक, सोडा, पैकेट वाले जूस जैसे मीठे पेय आजकल लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं। डॉ. सेठी इन्हें स्पार्कलिंग वाटर से बदलने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि इन पेय पदार्थों के ज्यादा सेवन से खासतौर पर युवाओं में कोलन कैंसर का खतरा बढ़ गया है। इनकी जगह आप नींबू पानी, छाछ, या घर के बने शिकंजी जैसे प्राकृतिक विकल्प चुन सकते हैं।
2. कॉकटेल की जगह अपनाएं नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स
डॉ. सेठी साफ करते हैं कि अल्कोहल, चाहे वो किसी भी रूप में हो, शरीर के लिए हानिकारक है। स्वास्थ्य के लिहाज से इसकी एक बूंद भी सुरक्षित नहीं मानी जाती, खासकर महिलाओं के लिए तो बिल्कुल नहीं। इसकी जगह आप ताज़े फलों के जूस, शर्बत, या अन्य नॉन-अल्कोहलिक पेय चुन सकते हैं जो स्वाद भी दें और सेहत को नुकसान भी न पहुंचाएं।
3. रेड मीट की जगह खाएं लीन प्रोटीन
कई शोधों में यह बात सामने आ चुकी है कि रेड मीट कैंसर के खतरे को काफी बढ़ा देता है। रेड मीट में बकरा, सूअर, भेड़ का मांस शामिल है। डॉ. सेठी की सलाह है कि इनकी जगह लीन प्रोटीन के स्रोत जैसे चिकन, मछली और अन्य पॉल्ट्री उत्पादों को अपनाएं, जो ज्यादा सेहतमंद विकल्प माने जाते हैं।
4. ब्रेड की जगह अपनाएं होल ग्रेन्स
भारत में कई लोगों ने नाश्ते में ब्रेड खाने की आदत डाल ली है। लेकिन ब्रेड रिफाइंड आटे से बनती है, जो एक प्रोसेस्ड उत्पाद है। किसी भी प्रोसेस्ड या रिफाइंड चीज का लंबे समय तक सेवन सेहत के लिए ठीक नहीं है और इससे पाचन संबंधी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। ब्रेड की जगह होल ग्रेन विकल्पों को चुनें, जैसे कि ज्वार, बाजरा, या रागी से बनी रोटियां, जो पोषण से भरपूर हैं।
3 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या सच में सिर्फ खान-पान बदलकर कैंसर का खतरा कम हो सकता है?
जी बिल्कुल! हालांकि कैंसर के कई कारण होते हैं, लेकिन आहार एक बहुत बड़ा फैक्टर है। स्वस्थ आहार अपनाकर आप अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं और उन हानिकारक तत्वों से बचते हैं जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह एक शक्तिशाली प्रिवेंटिव शील्ड की तरह काम करता है।
2. क्या ये सभी बदलाव एक साथ करने जरूरी हैं, या एक-एक करके भी शुरुआत कर सकते हैं?
बिल्कुल एक-एक करके शुरुआत कर सकते हैं! अचानक सब कुछ बदलने की जगह, छोटे-छोटे बदलाव ज्यादा टिकाऊ होते हैं। जैसे, पहले हफ्ते सिर्फ कोल्ड ड्रिंक बंद करें, अगले हफ्ते रेड मीट कम कर दें। इससे आपको आदत डालने में आसानी होगी और यह लंबे समय तक जारी रहेगा।
3. क्या ब्रेड की जगह ब्राउन ब्रेड लेना भी एक अच्छा विकल्प है?
बहुत हद तक हाँ! सफेद ब्रेड की तुलना में ब्राउन ब्रेड एक बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें कुछ फाइबर होते हैं। लेकिन सबसे बेहतरीन विकल्प तो वही हैं जो हमारी देसी थाली का हिस्सा रहे हैं – जैसे ज्वार, बाजरा, रागी या होल व्हीट (गेहूं के चोकर सहित आटे) से बनी रोटियां। ये नैचुरल होल ग्रेन हैं और प्रोसेसिंग से बचे हुए हैं, इसलिए ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं।





